सेना शामिल होने के लिए प्रिंस क्या क्या करते हैं, ये पूछने पर उसने वर्जिश और दौड़-भाग की बात कही.
ये कहते-कहते वो थोड़ा गंभीर होकर कहने लगा, ''डैडी कहते हैं कि पढ़-लिख ले, कुछ बन जा, खेतीबाड़ी में कुछ नहीं रखा है. घर के ख़र्चे बहुत हैं, 300 की दिहाड़ी में क्या होगा.''
इसी दौरान प्रिंस की मां ममता कीर्तन से वापस आ गईं और पास आकर बैठ गईं.
जब प्रिंस बोरवेल में गिरा था तो उस घटना के कुछ साल बाद ही उसको जन्म देने वाली मां उसके पिता से अलग हो गईं थी.
फिर साल 2012 में प्रिंस के पिता ने दूसरी शादी की. प्रिंस की मां ममता की जब इस घर में शादी हुई तो उनके पहले पति से तीन बच्चे थे.
ममता ने कहा, ''इन बच्चों में आपस में बहुत प्यार है. मेरा पहला पति बहुत शराब पीता था. बीमार हो गया और एक दिन उसकी मौत हो गई. ससुराल वालों ने मुझे अपने पास नहीं रहने दिया. मैं अपनी एक बेटी और दो बेटों को लेकर अपने पिता के घर आ गई. 2012 में मेरा इस गांव में विवाह हो गया.''
वो आगे कहती हैं, ''जब शादी हो गई तब जा कर पता चला कि मैं प्रिंस की मां बन गई हूं, वही प्रिंस जो गढ्ढे में गिर गया था. कहीं भी जाऊं लोग कहते हैं वो देखो प्रिंस की मम्मी जा रही है. ये सुनकर अच्छा लगता है.''
इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में प्रिंस का वक़्त कैसे गुज़रता है?
ये पूछने पर वो कहता है, ''छोटा भाई गौरव ऑनलाइन गेम PUBG का शौकीन है. मेरा गेम खेलने में कम मन लगता है.''
''मैं टिक-टोक पर वीडियो बताता हूं और फ़ेसबुक चला लेता हूं. बाक़ी कुछ समय खेत में पिता की मदद करवाता हूं."
मौजूदा राजनीतिक हालात पर प्रिंस का क्या सोचना है, इस बात के जवाब में वो कहता है, ''पता नहीं जी, नेता ज़रूरत पड़ने पर आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं फिर पता नहीं कहां ग़ायब हो जाते हैं.''
जब हम घर से बाहर निकले तो हमें गांव के कुछ नौजवान और प्रिंस के दोस्त मिल गए. गांव का ही एक नौजवान मनिंदर सिंह पास के ही एक अस्पताल में अटेंडेट की नौकरी करते हैं.
मौजूदा हालात के बारे में पूछने पर कहने लगे, ''देखो जी, नेताओं के बारे में बात करने का समय नहीं है हमारे पास. नौजवानों को तीन महीने की वैलेडिटी वाला अनलिमिटेड सस्ता इंटरनेट पैक व्यस्त रखता है.''
थोड़ा आगे बढ़े तो गांव की कुछ औरतें मिल गईं. शायद 2006 की घटना के समय मीडियाकर्मियों को आसानी से पहचान जाती हैं.
अपने नन्हे से पोते को गोद में उठाए एक बुज़ुर्ग औरत ने कहा, ''भई पत्रकार लग रहे हो, प्रिंस के घर आए थे? हमारी भी इंटरव्यू ले लो.''
मैंने पूछा माता जी ये बताइए कि प्रिंस के बोरवेल में गिरने की घटना को कैसे याद करती हैं?
वो औरत हंसकर कहने लगी, ''देखो जी, ये लड़का प्रिंस गढ्ढे में ऐसा गिरा कि सारे गांव की प्यास बुझ गई. और तो और हमारे गांव में पक्की गलियां और नालियां बन गईं.''
उस घटना के बाद तत्कालीन हु़ड्डा सरकार ने गांव में विकास कार्य के लिए ग्रांट जारी की थी.
जैसे ही हम मुड़ने लगे करीब 40 साल की एक औरत बोली, ''न्यूज़ चैनल वाले कहते हैं कि हमारे फौजियों ने पाकिस्तान पर हवाई जहाज़ से हमला करके कई आतंकवादी मार दिये, आप बताओ, आप भी तो पत्रकार हो, क्या यह सही है?''
मैने पूछा, आपको क्या लगता है? औरत ने कहा, ''हमें क्या पता जो टीवी वाले कहेंगे वही सुनेंगे ना.''
इस बातचीत के बात वापस आने के लिए हमने अपनी गाड़ी ली. कुछ दूर बढ़े ही थे कि सड़क किनारे खड़ी वही नन्ही बच्ची मुस्कुराते हुए हमारी तरफ देख रही थी.
हम हलदेहेड़ी गांव को पीछे छोड़ चले थे.
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ये कहते-कहते वो थोड़ा गंभीर होकर कहने लगा, ''डैडी कहते हैं कि पढ़-लिख ले, कुछ बन जा, खेतीबाड़ी में कुछ नहीं रखा है. घर के ख़र्चे बहुत हैं, 300 की दिहाड़ी में क्या होगा.''
इसी दौरान प्रिंस की मां ममता कीर्तन से वापस आ गईं और पास आकर बैठ गईं.
जब प्रिंस बोरवेल में गिरा था तो उस घटना के कुछ साल बाद ही उसको जन्म देने वाली मां उसके पिता से अलग हो गईं थी.
फिर साल 2012 में प्रिंस के पिता ने दूसरी शादी की. प्रिंस की मां ममता की जब इस घर में शादी हुई तो उनके पहले पति से तीन बच्चे थे.
ममता ने कहा, ''इन बच्चों में आपस में बहुत प्यार है. मेरा पहला पति बहुत शराब पीता था. बीमार हो गया और एक दिन उसकी मौत हो गई. ससुराल वालों ने मुझे अपने पास नहीं रहने दिया. मैं अपनी एक बेटी और दो बेटों को लेकर अपने पिता के घर आ गई. 2012 में मेरा इस गांव में विवाह हो गया.''
वो आगे कहती हैं, ''जब शादी हो गई तब जा कर पता चला कि मैं प्रिंस की मां बन गई हूं, वही प्रिंस जो गढ्ढे में गिर गया था. कहीं भी जाऊं लोग कहते हैं वो देखो प्रिंस की मम्मी जा रही है. ये सुनकर अच्छा लगता है.''
इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में प्रिंस का वक़्त कैसे गुज़रता है?
ये पूछने पर वो कहता है, ''छोटा भाई गौरव ऑनलाइन गेम PUBG का शौकीन है. मेरा गेम खेलने में कम मन लगता है.''
''मैं टिक-टोक पर वीडियो बताता हूं और फ़ेसबुक चला लेता हूं. बाक़ी कुछ समय खेत में पिता की मदद करवाता हूं."
मौजूदा राजनीतिक हालात पर प्रिंस का क्या सोचना है, इस बात के जवाब में वो कहता है, ''पता नहीं जी, नेता ज़रूरत पड़ने पर आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं फिर पता नहीं कहां ग़ायब हो जाते हैं.''
जब हम घर से बाहर निकले तो हमें गांव के कुछ नौजवान और प्रिंस के दोस्त मिल गए. गांव का ही एक नौजवान मनिंदर सिंह पास के ही एक अस्पताल में अटेंडेट की नौकरी करते हैं.
मौजूदा हालात के बारे में पूछने पर कहने लगे, ''देखो जी, नेताओं के बारे में बात करने का समय नहीं है हमारे पास. नौजवानों को तीन महीने की वैलेडिटी वाला अनलिमिटेड सस्ता इंटरनेट पैक व्यस्त रखता है.''
थोड़ा आगे बढ़े तो गांव की कुछ औरतें मिल गईं. शायद 2006 की घटना के समय मीडियाकर्मियों को आसानी से पहचान जाती हैं.
अपने नन्हे से पोते को गोद में उठाए एक बुज़ुर्ग औरत ने कहा, ''भई पत्रकार लग रहे हो, प्रिंस के घर आए थे? हमारी भी इंटरव्यू ले लो.''
मैंने पूछा माता जी ये बताइए कि प्रिंस के बोरवेल में गिरने की घटना को कैसे याद करती हैं?
वो औरत हंसकर कहने लगी, ''देखो जी, ये लड़का प्रिंस गढ्ढे में ऐसा गिरा कि सारे गांव की प्यास बुझ गई. और तो और हमारे गांव में पक्की गलियां और नालियां बन गईं.''
उस घटना के बाद तत्कालीन हु़ड्डा सरकार ने गांव में विकास कार्य के लिए ग्रांट जारी की थी.
जैसे ही हम मुड़ने लगे करीब 40 साल की एक औरत बोली, ''न्यूज़ चैनल वाले कहते हैं कि हमारे फौजियों ने पाकिस्तान पर हवाई जहाज़ से हमला करके कई आतंकवादी मार दिये, आप बताओ, आप भी तो पत्रकार हो, क्या यह सही है?''
मैने पूछा, आपको क्या लगता है? औरत ने कहा, ''हमें क्या पता जो टीवी वाले कहेंगे वही सुनेंगे ना.''
इस बातचीत के बात वापस आने के लिए हमने अपनी गाड़ी ली. कुछ दूर बढ़े ही थे कि सड़क किनारे खड़ी वही नन्ही बच्ची मुस्कुराते हुए हमारी तरफ देख रही थी.
हम हलदेहेड़ी गांव को पीछे छोड़ चले थे.
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